हंस योग

हंस योग को वैदिक ज्योतिष के अनुसार किसी कुंडली में बनने वाले बहुत शुभ योगों में से एक माना जाता है तथा यह योग पंचमहापुरुष योग में से एक है। पंच महापुरुष योग में आने वाले शेष चार योग माल्वय योग, रूचक योग, भद्र योग एवम शश योग हैं। वैदिक […]

शनि साढ़े सती तथा ढैय्या

ज्योतिष में शनि ग्रह के साथ सबसे अधिक भयावह परिणामों को जोडा जाता है तथा बहुत से ज्योतिषि एवम पंडित तो अधिकतर लोगों को उनकी समस्याओं का मूल कारण शनि ग्रह से संबंधित ही बताते हैं। वैसे तो भारतीय ज्योतिष में शनि महाराज के साथ कई तरह की धारणाओं को […]

शकट योग ..अधि योग

शकट योग : वैदिक ज्योतिष के अनुसार शकट योग को अशुभ योग माना जाता है तथा अनेक वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि किसी कुंडली में शकट योग बनने पर जातक को गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। गज केसरी योग की भांति ही शकट योग भी […]

बुध आदित्य योग

वैदिक ज्योतिष में प्रचलित परिभाषा के अनुसार किसी कुंडली के किसी घर में जब सूर्य तथा बुध संयुक्त रूप से स्थित हो जाते हैं तो ऐसी कुंडली में बुध आदित्य योग का निर्माण हो जाता है तथा इस योग का शुभ प्रभाव जातक को बुद्धि, विशलेषणात्मक क्षमता, वाक कुशलता, संचार […]

केमद्रुम योग

वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली में बनने वाले विभिन्न प्रकार के अशुभ योगों में से केमद्रुम योग को बहुत अशुभ माना जाता है। केमद्रुम योग की प्रचलित परिभाषा के अनुसार किसी कुंडली में यदि किसी कुंडली में चन्द्रमा के अगले और पिछले दोनों ही घरों में कोई ग्रह न हो […]

ग्रहण योग

हण योग को वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली में बनने वाला एक अशुभ योग माना जाता है जिसका किसी कुंडली में निर्माण जातक के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में समस्याएं पैदा कर सकता है। वैदिक ज्योतिष में ग्रहण योग की प्रचलित परिभाषा के अनुसार यदि किसी कुंडली में सूर्य अथवा […]

chandra mangal yog

वैदिक ज्योतिष में चन्द्र मंगल योग की प्रचलित परिभाषा के अनुसार यदि किसी कुंडली में चन्द्रमा तथा मंगल कुंडली के एक ही घर में स्थित हो जाते हैं तो ऐसी कुंडली में चन्द्र मंगल योग का निर्माण हो जाता है। चन्द्र मंगल योग द्वारा प्रदान किये जाने वाले फलों के […]

दुर योग एवं दरिद्र योग

दुर योग तथा दरिद्र योग को वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली मे बनने वाले योगों में से अशुभ माना जाता है तथा अनेक वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि किसी कुंडली में इन दोनों योगों में से किसी योग के बन जाने से जातक के व्यवसाय तथा आर्थिक समृद्धि पर […]

guru chandal yog

वैदिक ज्योतिष में गुरु चांडाल योग की प्रचलित परिभाषा के अनुसार यदि किसी कुंडली में गुरु अर्थात बृहस्पति के साथ राहु या केतु में से कोई एक स्थित हो अथवा किसी कुंडली में गुरु का राहु अथवा केतु के साथ दृष्टि आदि से कोई संबंध बन रहा हो तो ऐसी […]

angarak yog

अंगारक योग की वैदिक ज्योतिष में प्रचलित परिभाषा के अनुसार यदि किसी कुंडली में मंगल का राहु अथवा केतु में से किसी के साथ स्थान अथवा दृष्टि से संबंध स्थापित हो जाए तो ऐसी कुंडली में अंगारक योग का निर्माण हो जाता है जिसके कारण जातक का स्वभाव आक्रामक, हिंसक […]

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